Saturday, March 4, 2017
Monday, February 6, 2017
Saturday, February 4, 2017
Thursday, November 17, 2016
बैंक एटीएम आते रहिए जाते रहिए
नोट बदलवाने के लिए
एक्सिस बैंक की लाइन में खड़े-खड़े बोर होने लगा तो अपने आईडी प्रूफ की फोटोकॉपी
के पीछे कविता लिख दी। मुलाहिजा फरमाइए-
नोट बदलकर मंद-मंद
मुस्काते रहिए।
बैंक एटीएम आ ते रहिए
जाते रहिए।।
देश हुआ मदहोश होश
की चाह नहीं।
कौन बताए राह, राह
की चाह नहीं।।
भीड़ लगाकर ऐसे ही
टकराते रहिए।
बैंक एटीएम आते रहिए
जाते रहिए।।
नकली धोखा देते थे
पर कभी-कभी।
यह खयाल भी आता था
पर कभी-कभी।।
अब असली से प्रतिदिन
धोखा खाते रहिए।
बैंक एटीएम आते रहिए
जाते रहिए।।
अर्थव्यवस्था से
करके बरजोरी जो।
हर गरीब से करके
सीनाजोरी जो।।
खिसक गई है वह जमीन
खिसकाते रहिए।
बैंक एटीएम आते रहिए
जाते रहिए।।
रैली, भाषण, लूटपाट
और पत्थरबाजी।
बंद हुए हैं बोलो
भाई हां जी, हां जी।।
बदल रहा है देश ये
गाना गाते रहिए।
बैंक एटीएम आते रहिए
जाते रहिए।।
लंबी लाइन छोटा
पैसा।
सच्चा हो या ऐसा
वैसा।।
बैंक बंद हो जाए तो
गरियाते रहिए।
बैंक एटीएम आते रहिए
जाते रहिए।।
Saturday, April 25, 2015
भूकंप ने दिलाई ''आप'' को राहत
शनिवार को भूकंप आने से पहले टीवी न्यूज चैनलों पर उनके एंकर गजेंद्र की आत्महत्या से जुड़े मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं को पानी पी पी कर कोस रहे थे। ऐसा लग रहा था, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ठेका दे रखा है कि इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को निपटा दो। पार्टी के नेताओं के माफी मांगने का भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। उनकी इस हरकत पर कोई रोक नहीं लग रही थी। अंत में उन्हें रोकने के लिए भूकंप को आना पड़ा।
आखिर ऐसा क्यों। इसके दो ही कारण हो सकते हैं। एक टीआरपी और दूसरा मोदी की कृपा। जनहित पर स्वार्थ को अंधा होते देख कर भूकंप को भी सहन नहीं हुआ और टीवी न्यूज चैनल के एंकरों को रोकने के लिए उसे आना पड़ा। हालांकि भूकंप से ज्यादा नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन यह बात पक्की है कि भूकंप न आता तो ये टीआरपीखोर आम आदमी पार्टी नेताओं के पीछे न जाने कब तक पड़े रहते।
आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आम आदमी की समस्याओं के प्रति बहुत ही संवेदनशील हैं। वह टीवी न्यूज चैनलों से बार बार आग्रह कर रहे हैं कि इस तरह की हरकत से बाज आएं और उन मुद्दों पर चर्चा शुरू करें, जो किसानों के जीवन से जुड़े हों। पिछले दिनों अखबार मालिकों से त्रस्त पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिशोदिया से मिला था। उस समय अरविंद केजरीवाल ने कहा था-हम अखबार मालिकों के साथ नहीं, पीडि़त पत्रकारों के साथ हैं। अब आप ही बताएं कि वह आम आदमी की समस्याओं के प्रति संवेदनशील न होते तो ऐसा बयान देने का जोखिम क्यों उठाते। यह बताने की जरूरत नहीं है कि लगभग सभी अखबार और न्यूज चैनल मजीठिया मामले की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली के मुख्यमंत्री के आदेश में भी कोई खबर नजर नहीं आती। हालत यह है कि बड़े बड़े मीडिया घराने एकपक्षीय पत्रकारिता का झंडा लिए खड़े हैं और यह करने में उन्हें कोई शर्म नहीं आ रही है। शायद यही वजह है कि इन मीडिया घरानों के भोंपू को नजर अंदाज कर दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी की झोली में 70 में 67 सीटें डाल दी। अरविंद केजरीवाल इसके हकदार भी थे, इसमें कोई संशय नहीं है।
आखिर ऐसा क्यों। इसके दो ही कारण हो सकते हैं। एक टीआरपी और दूसरा मोदी की कृपा। जनहित पर स्वार्थ को अंधा होते देख कर भूकंप को भी सहन नहीं हुआ और टीवी न्यूज चैनल के एंकरों को रोकने के लिए उसे आना पड़ा। हालांकि भूकंप से ज्यादा नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन यह बात पक्की है कि भूकंप न आता तो ये टीआरपीखोर आम आदमी पार्टी नेताओं के पीछे न जाने कब तक पड़े रहते।
आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आम आदमी की समस्याओं के प्रति बहुत ही संवेदनशील हैं। वह टीवी न्यूज चैनलों से बार बार आग्रह कर रहे हैं कि इस तरह की हरकत से बाज आएं और उन मुद्दों पर चर्चा शुरू करें, जो किसानों के जीवन से जुड़े हों। पिछले दिनों अखबार मालिकों से त्रस्त पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिशोदिया से मिला था। उस समय अरविंद केजरीवाल ने कहा था-हम अखबार मालिकों के साथ नहीं, पीडि़त पत्रकारों के साथ हैं। अब आप ही बताएं कि वह आम आदमी की समस्याओं के प्रति संवेदनशील न होते तो ऐसा बयान देने का जोखिम क्यों उठाते। यह बताने की जरूरत नहीं है कि लगभग सभी अखबार और न्यूज चैनल मजीठिया मामले की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली के मुख्यमंत्री के आदेश में भी कोई खबर नजर नहीं आती। हालत यह है कि बड़े बड़े मीडिया घराने एकपक्षीय पत्रकारिता का झंडा लिए खड़े हैं और यह करने में उन्हें कोई शर्म नहीं आ रही है। शायद यही वजह है कि इन मीडिया घरानों के भोंपू को नजर अंदाज कर दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी की झोली में 70 में 67 सीटें डाल दी। अरविंद केजरीवाल इसके हकदार भी थे, इसमें कोई संशय नहीं है।
Wednesday, April 22, 2015
Wednesday, October 26, 2011
ये कैसी दीवाली
महंगाई ने किया दिवाला, ये कैसी दीवाली।
हर मुंह से छिन रहा निवाला, ये कैसी दीवाली।।
कौन खरीदे सोना चाँदी, है तबाह आबादी।
सब्जी खाने में ही अब तो, होनी है बरबादी।
जिधर देखिये उधर घोटाला, ये कैसी दीवाली।।
लक्ष्मी जी तो स्विस विराजें, कैसे होगी पूजा।
हम गणेश गोबर के बन गए, रहा उपाय न दूजा।
कर्ज बनाता है मतवाला, ये कैसी दीवाली।।
ब्रांड बन गए मार्केट सज गईं, बिगड़ रहा इंसान।
जीवन कैसे जीना होगा, ये जानें भगवान।
लुटता है हर भोला भाला, ये कैसी दीवाली।।
Wednesday, August 24, 2011
बहुत बड़ी भूल
लोग कायदे से रहें तो कानून की जरूरत ही न पड़े, लेकिन यह उम्मीद करना कि कानून ही सबकुछ कर देगा, बहुत बड़ी भूल होगी।
Thursday, August 4, 2011
असुरक्षित नोएडा-दूसरी किस्त
ईसीएम क्या होता है : सेक्टर-२४ थाने में ऑनलाइन एफआईआर मौखिक रूप से स्वीकार तो कर ली गई, लेकिन चोरी के सिलसिले में पुलिस विभाग की कोई पहल सामने नहीं आई। पत्रकार साहब ने ऑनलाइन एफआईआर की बात को कुछ लोगों से शेयर भी कर लिया था। कार्रवाई होती न देख वह अजीब सा महसूस कर रहे थे। कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि ऑनलाइन एफआईआर पर कार्रवाई न होने से किसकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है-ऑनलाइन व्यवस्था की, पुलिस विभाग की, सरकार के दावों की अथवा स्वयं पत्रकार महोदय की। भाई कोई अपनी प्रतिष्ठा की परवाह करे या न करे, पत्रकार साहब को तो करनी ही थी। बस उन्होंने थैली से मोबाइल फोन कुछ इस अंदाज में निकाला, जैसे महाभारत काल में महारथी म्यान से अपनी तलवार निकाल लेते थे। कई बार प्रयास किया तो एक बार सौ नंबर पर लग ही गई काल। हैलो-नोएडा पुलिस।
सर---हमारी कार का ईसीएम चोरी हो गया है।
पुलिस-ईसीएम क्या होता है।
---अरे साहब पिछले दस वर्षों से ईसीएम चोरी हो रहा है। आज कल तो ऑडियो सिस्टम का दाम कम हो जाने से ईसीएम ही चोरी हो रहा है। जब आप ईसीएम को जानते-पहचानते नहीं, तो उसे बरामद कैसे कर पाएंगे।
इसी बीच पीछे से दूसरा पुलिसवाला फुसफुसाया----ईसीएम से कार का इंजन नियंत्रित होता है। महंगी मशीन होती है। पंद्रह से बीस हजार में नई आती है।
जारी रहेगी दास्तां---करें अगली किस्त का इंतजार--------
सर---हमारी कार का ईसीएम चोरी हो गया है।
पुलिस-ईसीएम क्या होता है।
---अरे साहब पिछले दस वर्षों से ईसीएम चोरी हो रहा है। आज कल तो ऑडियो सिस्टम का दाम कम हो जाने से ईसीएम ही चोरी हो रहा है। जब आप ईसीएम को जानते-पहचानते नहीं, तो उसे बरामद कैसे कर पाएंगे।
इसी बीच पीछे से दूसरा पुलिसवाला फुसफुसाया----ईसीएम से कार का इंजन नियंत्रित होता है। महंगी मशीन होती है। पंद्रह से बीस हजार में नई आती है।
जारी रहेगी दास्तां---करें अगली किस्त का इंतजार--------
Saturday, July 30, 2011
असुरक्षित नॉएडा-पहली किस्त
नॉएडा का मतलब नो आइडिया। इस हाई टेक शहर में आइडिया कितना भी जोरदार हो, वह लागू नहीं हो पाता। यही वजह है कि यहाँ अच्छी खासी तकनीक का बैंड बज रहा है, और यही बताने के लिए एक सच्ची कहानी सुना रहा हूँ ।28 जुलाई को सेक्टर 12 के बी ब्लाक में एक मारुती वैन से उसका इसिएम-इंजिन कंट्रोल मोड्यूल- चोरी हो गया। वह भी सुरक्षा गार्ड के होते हुए। अब उसके मालिक ठहरे पत्रकार। समय उनके पास था नहीं कि थाने में एफ आई आर दर्ज कराने जा पायें। सोचा तकनीक का सहारा लेते हैं । फिर क्या था, उन्होंने झट गूगल पर सर्च मारा और नॉएडा पुलिस की वेब साईट खुल गई। जब एफ आई आर का आप्सन दिखा तो राहत की सांस ली। उन्होंने आन लाइन शिकायत दर्ज करा दी। उसकी पुष्टि भी मेल से उन्हें मिल गई। जब सेक्टर 24 थाने में अगले दिन कार्रवाई के बारे में पता करने गए तो वहां पूछा गया कि आन लाइन कौन सी चिड़िया होती है। जब मेल का प्रिंट दिया तो उसे आँख फाड़ कर देखा जाने लगा। पुलिस वालों ने कहा, अरे ----एफ आई आर दर्ज हो गया और हमें पता भी नहीं चला। कथा जारी रहेगी ------बाकी अगली किस्त में --------
Thursday, July 21, 2011
Friday, June 24, 2011
बेच दो बेच दो
बेच दो बेच दो -------इन्सान बेच दो ------ भगवान बेच दो------गली मोहल्ला नहीं ----- पूरा हिंदुस्तान बेच दो -------भाव गिर रहा है -------ईमान बेच दो ----
Wednesday, October 20, 2010
बारूद से ज्यादा
Tuesday, October 12, 2010
तुम्ह समान नहि कोऊ

तुम्ह समान नहि कोऊ, मां दुर्गे तुम्ह समान नहिं कोऊ.....
ज्ञानिन्ह कर चित खींचत बल से
सींचत हो मन मोह के बल से
सुमिरन करत हरहु भय सारा
चिन्तन करत करहु उपकारा
हर लेती दारिद, भय दोउ, तुम्ह समान नहि कोऊ.....
नारायणि मंगलमय रानी
सब मंगल तुम्ह करहु भवानी
सिद्ध करहु तुम्ह सब पुरुषारथ
शरणागत वत्सल परमारथ
नहि सहाय तुम्ह बिनु अब कोउ, तुम्ह समान नहि कोऊ.....
शरणागत, पीड़ित की रक्षा
सबहि भान्ति तुम्ह करहु सुरक्षा
हरती पीड़ा त्रिनेत्र गौरी
सुनि पुकार आवहु तुम्ह दौरी
तुम्हहि प्रणाम करत सब कोऊ, तुम्ह समान नहि कोऊ....
सर्वेश्वरि मां सर्वस्वरूपा
दुर्गे देवि मां दिव्य स्वरूपा
रक्षा कर हे शक्ति स्वरूपा
दे दो मां निज भक्ति अनूपा
पुरुष, प्रकृति तुम्ह दोऊ, तुम्ह समान नहि कोऊ......
हो प्रसन्न सब रोग नसाए
कुपित भए सब काम नसाए
तुम्हरी शरण शरणदाता भए
सब बाधा हर शत्रु नसाए
आवत नहि विपत्ति तब कोऊ, तुम्ह समान नहि कोऊ.....
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